राष्ट्र चिंतन
गले की फांस बनेगी स्मार्ट सिटी ?
किसके लिए होगी स्मार्ट सिटी?
विष्णुगुप्त
‘स्मार्ट सिटी‘ को लेकर अनेकानेक जिज्ञासाएं हैं, अनेकानेक प्रश्न है, अनेकानेक दिलचस्पियां है, अनेकानेक आशांकाएं हैं, अनेकानेक खुशफहमियां हैं, अनेकानेक प्रचार मिथ हैं? जैसे स्मार्ट सिटी किसके लिए होगी, स्मार्ट सिटी किसके लिए नहीं होगी, स्मार्ट सिटी किसका विकास करेगी, स्मार्ट सिटी किसका विकास रोकेगी, स्मार्ट सिटी किसके सपने पूरे करेगी,स्मार्ट सिटी किसके सपने उजारेगी, स्मार्ट सिटी क्या पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, स्पार्ट सिटी क्या पर्यावरण विध्वंस का प्रतीक बनेगी, क्या स्मार्ट सिटी में हाशिये पर खड़े और आत्महत्या के लिए मजबूर व बाध्य हो रहे किसानों के लिए भी कोई जगह होगी, स्मार्ट सिटी क्या सिर्फ सूटबूट वालों के लिए होगी या फिर स्पार्ट सिटी में ग्रामीण व कस्बों के बैरोजगार युवकों के लिए भी होगी, स्मार्ट सिटी क्या अडानी-अंबानी जैसे आर्थिक सामंतों की तिजोरी भरने वाली होगी, स्मार्ट सिटी क्या मजदूरों को शरण देगी, स्मार्ट सिटी क्या नरेन्द्र मोदी की किस्मत चमकायेगी या फिर नरेन्द्र मोदी के गले की फांस बनेगी? ये सभी प्रश्न हमारे जैसे देश के लाखों जिज्ञासुओं का है। पर नरेन्द्र मोदी सरकार कहती है कि स्पार्ट सिटी विकास व उन्नति के नये पायदान बनायेगी, बैरोजगारी दूर करेगी, पर्यावरण संरक्षण करेगी, एक ही स्थान पर सभी जरूरी उपयोगी संसाधन उपलब्ध होगा, भारत दुनिया के सबसे चमकीले शहरों वाला देश होगा, स्मार्ट सिटी राष्टीय आर्थिक ग्रोथ का अगुवा बनेगी?
ड्रीम स्मार्ट सिटी के प्रशंसक कौन-कौन हैं? सच तो यह है कि मोदी के ड्रीम स्मार्ट सिटी की प्रशंसा देश की सीमा से बाहर भी हो रही है और ड्रीम स्मार्ट सिटी की सफलता की प्रत्याशा में पूरी दुनिया है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्टपति बराक ओबामा तक ड्रीम स्मार्ट सिटी के प्रशंसक हैं। बराक ओबामा ने टाइम मैग्जीन में लिखे लेख में नरेन्द्र मोदी को आर्थिक सुधारों का अगुआ बताया है। बराक ओबामा की इस धारणा के पीछे ड्रीम स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाएं हैं जो नरेन्द्र मोदी के एजेंटे में शामिल हैं। डीम स्मार्ट सिटी के प्रशंसक और पैरोकार दुनिया भर के कारपोरेट घराने व हस्तियां हैं,दुनिया भर के प्रोफेशनल हैं, दुनिया भर के बड़े-बडे निवेशक हैं जिन्हें स्मार्ट सिटी में निवेश से पूंजी दोगुनी-चार गुनी होनी की उम्मीद है। ड्रीम स्मार्ट सिटी के प्रशंसक और पैरोकार देशी-विदेश औद्योगिक घराने हैं जिन्हें स्मार्ट सिटी परियोजना का लाभार्थी बनने की उम्मीद है। ड्रीम स्मार्ट सिटी के प्रशंसक और पैरोकार रियल स्टेट व अन्य निर्माण क्षेत्र की कंपनियां हैं जिन्हें ड्रीम स्मार्ट सिटी परियोजना में भागीदारी मिलने की उम्मीद है। ड्रीम स्मार्ट सिटी के पैरोकार वैसे लोग हैं जिनके पास अपार पैसा है, ब्लैक मनी है जो उसमें निवेश कर अपने लिए आलीशान, अति आधुनिक और सुविधाओं से लैश कार्यालय व आवासीय सुविधा हासिल कर सकते हैं।
स्मार्ट सिटी परियोजना के विरोधी कौन-कौन लोग होंगे? डीम स्मार्ट सिटी परियोजना का सबसे ज्यादा विरोधी किसान ही होंगे। आखिर क्यों? इसलिए कि स्मार्ट सिटी परियोजना में जमीन तो किसान व मजदूरों की ही जायेगी? स्मार्ट सिटी परिजयोना के लिए जमीन चाहिए, स्मार्ट सिटी तो आसमान में बनेगी नहीं, बनेगी तो जमीन पर ही। एक-एक स्मार्ट सिटी के लिए कोई एक -दो एकड़ भूमि नहीं बल्कि हजारों-लाखों एकड़ भूमि चाहिए। स्मार्ट सिटी कोई घने और दुरूह जंगलों के बीच तो बनेगी नहीं। घने जंगलों और दुरूह इलाको में स्मार्ट सिटी बनेगी तो वहां जायेगा कौन है और दुनिया की आधुनिक सुविधाओं का जाल बिछेगा तो कैसे? स्मार्ट सिटी बड़े शहरों के आजू-बाजू या फिर अति सुगम वाले क्षेत्रों में ही बनेगी। बड़े शहरों के किनारे जो गांव है और जो किसान हैं उनकी जमीन सीधे तौर पर लूटी जायेगी, फलस्वरूप् किसान की आजीविका मारी जायेगी। मुआबजा कितना मिलेगा, कब मिलेगा, मुआबजा राशि प्रभावित परिवारों की जीविका कितने दिनों तक खीचेगी? यह कहना मुश्किल है।
स्मार्ट सिटी की अवधारणा क्या है और स्मार्ट सिटी की अवधारणा कहां से आयी है तथा किस सोच व किस उद्देश्य से आयी है। स्मार्ट सिटी की अवधारण एक पश्चिमी सोच से निकली हुई है, अमेरिका यूरोप से आयी हुई है। स्मार्ट सिटी की अवधारणा पिछली सदी के नब्बे के दशक में आयी थी। इस अवधारणा के जनक डेविड बाॅलियर थे जिन्होंने शहरों को व्यवस्थित ढंग से और सुविधाओं से लैश कर बसाने का विचार दिया था। 2002 में रार्बट काॅडवेल ने अमेरिकी शहर पोर्टलैड को स्मार्ट सिटी ग्रोथ के रूप में प्रस्तुत किया था। पर दुूनिया यह नहीं जानती कि अमेरिकी शहर पोर्टलैंड सही मायने में स्मार्ट है और वह न्यूयार्क, लंदन, सिडनी, टोक्यों से भी चमकीला है। दुनिया में आज एक भी स्मार्ट सिटी की अवधारणा वाली सिटी नहीं है जो औद्योगिक दृष्टिवाले शहर जैसे मैनचेस्टर और शंघाई को मात देती है या फिर सुख-सुविधाओं से लैश न्यूयार्क,टोक्यों, लंदन, सिडनी और दुबई को चुनौती देती है। हमारे देश में सबसे व्यवस्थित शहर चंडीगढ़ बसा हुआ है। पर चडीगढ़ शहर की कल्पना और विस्तार का शुद्ध अवधारणा प्रशासकीय सुविधाओं का विस्तार और व्यवस्थित करना था, औद्योगिक दृष्टि-कारपोरेट दृष्टि कदापि नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रोथ की सोच भी इसमें शामिल नहीं थी। चंडीगढ़ शहर आज भी आम आदमी का शहर नहीं है। चंडीगढ़ में बडे धनासेठों और धनपशुओं को ही सम्मान और आश्रय देता है।
नरेन्द्र मोदी की स्मार्ट सिटी कैसी होगी? इस पर भी अभी तक कोई स्पष्ट रूप-रेखा सामने नहीं आयी है। पर यह प्रचारित किया गया है कि एक ऐसा शहर जो उर्जा और जल का खपत कम करता हो, रोजगार देता हो, सभी नागरिक सुविधाएं प्रदान करता हो, शिक्षा-स्वास्थ्य की सुविधाएं अगल-बगल में ही होनी चाहिए, पूरा तंत्र कपंयूटर आधारित होना चाहिए। सबसे बड़ा सपना पर्यावरण संरक्षण का दिखाया जा रहा है। स्मार्ट सिटी से पर्यावरण संरक्षण कैसे होगा यह समझ से बाहर है। स्मार्ट सिटी बनाने में कितना पर्यावरण विध्वंस होगा, इसकी कल्पना तक नहीं हो सकती है। स्मार्ट सिटी परियोजना को पूरा करने के लिए पत्थर, सीमेट, ईंट, अलकतरा, लोहा के खपत होंगे, क्या इन्हें बनाने में पर्यावरण नष्ट नहीं होता है? स्मार्ट सिटी को विकसित करने के लिए खेतों की हरियाली की बलि चढ़ायी जायेगी, हजारों-लाखों पेड़ कटेंगे। विचारणीय विषय यह भी है कि स्मार्ट सिटी में उर्जा और जल का कम खपत कैसे संभव होगा? ठंड और गर्मी दोनों परिस्थितियों में एयरकंडिशन की सुविधा चाहिए। एयरकंडिशन की सुविधा के बिना स्मार्ट सिटी में कौन सा प्रोफेशनल रहेगा? करोड़ों-अरबों निवेश कर अपना कार्यालय, अपना आवास बनाने वाला धनपशु से आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं वह संयमित -नियंत्रित जीवन जीये। आधुनिक जमाने में पैसा खर्च करने वाला व्यक्ति आराम, उपभोग, लाभार्थी होने की इच्छा रखता है। ऐसे लोगों के लिए मौज मस्ती के साथ ही साथ पूंजी निवेश का अधिकतम लाभ चाहिए। ऐसी स्थिति में कितना पर्यावरण नष्ट होगा, कितना उर्जा व जल का विनाश होगा उसका आप अंदाजा लगा सकता हैं। स्मार्ट सिटी के सपने में यह उम्मीद की जा रही है कि गांधी की तरह लोग नियंत्रित और कम खपत मे जिंदगी गुजारे? इस खुशफहमी की हवा आज न कल तो निकलनी ही है।
स्मार्ट सिटी में कोई रिक्शा वाला नहीं होगा, स्मार्ट सिटी में कोई आटोवाला नहीं होगा, कोई मजदूर अपनी झुग्गियां नहीं लगा सकता है, कोई मजदूर और आम-आदमी सड़कों की पटरियों पर सो नहीं सकता है, अपना आशियाना डाल नहीं सकता है? स्मार्ट सिटी में अगर रिक्शावाला होगा, आटोवाला होगा, मजदूरों-आम आदमी का आशियाना होगा तो वह फिर स्मार्ट सिटी कैसे रहेगी, फिर वह सिटी तो पटना, अमृतशहर, भोपाल, कोलकाता जैसी ही हो जायेगी। स्मार्ट सिटी में मजदूर तो होंगे पर उसका आशियाना स्मार्ट सिटी की परिधि से दर्जनों किलोमीटर दूर होगा। स्मार्ट सिटी में उच्चे दर्जे के शिक्षार्थी ही लाभार्थी होंगे, कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए कोई जगह कहां होगी। गांव-कस्बे के गरीब अभिभावक लाखों रूपये देकर आज की आधुनिक शिक्षा बच्चों को दिला पाते कहां हैं? यह बात स्मार्ट सिटी की अवधारणा वालो को कहां समझ में आयेगी।
स्मार्ट सिटी नरेन्द्र मोदी का चुनावी डीम योजना है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान नरेन्द्र मोदी ने चुनाव जीतने के लिए जनता से 100 नये स्मार्ट सिटी बनाने का वायदा किया था। वायदे को पूरा करने के लिए अब नरेन्द्र मोदी ने कदम भी उठा दिये हैं। 100 नये स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल ने 48 हजार करोड़ रूपये भी स्वीकृत कर दिये हैं। नरेन्द्र मोदी के पांच साल के कार्यकाल का पहला वर्ष लगभग पूरा होने वाला है, अगले चार साल में एक सौ स्मार्ट सिटी बन कर तैयार हो जायेंगी, यह कहना मुश्किल है। अगर यह कामयाबी हासिल हो सकती है तो फिर नरेन्द्र मोदी अनुकरणीय इतिहास बना सकते हैं अगर नाकामयाबी मिलती है तो उनका राजनीतिक भविष्य भी अंधकारमय हो सकता है या फिर 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की तरह गर्त में जा सकता है। स्मार्ट सिटी को लेकर जनता और राजनीतिक दलों का बंवडर भी देखना शेष है।
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