Saturday, 11 April 2015

गंगातट पर बैठ कर राम राज्य का एक ४ मिनट का संक्षिप्त परिचय

अपने होम-टाउन ऋषिकेश आया हुआ हूँ. शाम को गंगा तट पर बैठ कर भारतीय सभ्यता के अतीत की ओर देखने में अच्छा लगता है. इस देश के अतीत को आज के पढ़े-लिखे लोग कम ही जानते हैं.  जो जानते हैं वे हैरान रहते हैं. मैं भी हैरान रहता हूँ कि राम जैसे राजा (और उनसे मिलते जुलते अनेक और राजाओं का आख्यान हम पुराणों में पढ़ते हैं . मगर पुराण पढ़ने  का समय आज अंगरेजी के अहंकार में डूबे किस बुद्धिजीवी को है?) उतने प्राचीन काल में  हुआ करते थे! राम जैसे राजा खुद ही अपवाद स्वरुप पैदा नहीं हुए. उन जैसे राजाओं को एक सभ्यता ने पैदा किया - उस सभ्यता के आदर्शों ने! वही सभ्यता, जिसे विनष्ट करने में सभी अंगरेजी पढ़े-लिखे लोग पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में लगे हुए हैं, पूरी ताकत से.  उससे भी हैरान करने वाली बात है राम राज्य की अवधारणा जो रामचरित मानस में आज से ५०० साल पहले लिखी गयी. तुलसीदास ने इस अवधारणा को पूरी . तरह स्वयं नहीं गढ़ा. पुरानी किताबों से वैसे ही लिया जैसे राम कथा  को लिया.  गवर्नेंस का इतना विकसित कॉन्सेप्ट तो अभी भी देखने में नहीं आता. अभी अपनी एक महत्त्वपूर्ण किताब को अंतिम टच देने में व्यस्त हूँ. मगर गंगा तट पर टहलते-बैठते  विनीता  मोबाइल से कुछ-कुछ वीडियों तो ले ही लेती हैं  - मेरी किताब से इतर विषयों पर.  मुझे अतिरिक्त समय नहीं देना पड़ता. एक छोटा सा विडिओ लिंक राम राज्य  पर अटैच करता हूँ - साढ़े चार मिनट का. शाम को डूबते सूरज के आलोक में गंगा और गंगा तट को देखें! ऋषिकेश की शांत, निर्मल, प्रांजल गंगा!  बाद में राम राज्य पर कुछ लिख कर भी ब्लॉग पर डालूँगा, उनके लिए जो वीडियों देखने में असमर्थ हैं, धीमे इंटरनेट कनेक्शन के कारण. जो वीडियों देख सकते हैं वे इस लिंक को क्लिक करें  -

https://youtu.be/wfdBKKeLDWk




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