Thursday, 23 April 2015

देश के बुद्धिजीवियों और क्रियावादियों के नाम एक चिठ्ठी


देश के बुद्धिजीवियों और क्रियावादियों (ऐक्टिविस्ट्स) के नाम एक पत्र

दोस्तो,     
                      
आपमें से प्रत्येक एक विचारक और शायद एक प्रबुद्ध क्रियावादी ऐक्टिविस्ट  भी है, और आप अपने स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझते हुए या तो  संघर्षात्मक या रचनात्मक कार्यों में लगे रहे हैं ताकि समाज बेहतरी की ओर मुड़ सके. लेकिन साथ-ही-साथ आपमें से प्रत्येक यह देख रहा होगा कि देश की परिस्थिति फिर भी बिगड़ती ही जा रही है. इसलिए आपमें से प्रत्येक कहीं-न-कहीं एक हताशा और पराजय का अनुभव कर रहे हैं. जो भ्रष्ट हैं, नैतिकताविहीन हैं, अनगढ़, अनपढ़ और अप्रबुद्ध हैं, वे आपस में सांठ-गांठ कर संसद से सड़क तक अपनी विजय पताका फहरा रहे हैं. अच्छे और ईमानदार समझे जाने वाले व्यक्ति और संगठन हाशिये पर खड़े इतिहास की उस लहर का इंतज़ार कर रहे हैं जो शायद कहीं से उठे और उन्हें बटोर कर वहाँ पहुँचा दे जहां उनका सही गंतव्य है.

२. इतिहास ने समय-समय पर ऐसी लहरों को उठते देखा है.  ऐतिहासिक परिस्थितियों की भूमिका इसमें जरूर होती है, मगर इतिहास इन लहरों को अकेले नहीं गढ़ता. इसमें व्यक्तियों की भूमिका होती है. इतिहास ने आज परिस्थितियाँ बना दी हैं मगर इन  लहरों को खड़ा करने के लिए सही व्यक्ति सही सख्या में नहीं खड़े हो पाए. आज इस देश के ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को खड़ा करने की जरूरत है जो सकारात्मक सोच वाले हों, जिसकी आँखों में राष्ट्रनिर्माण के सपने हों, और जिसका ह्रदय देश  के लिए व्यथित हो. उन सभी व्यक्तियों की शिनाख्त  कर उन्हें  जोड़ लेना है ताकि उनमें से प्रत्येक इतिहास के आने वाले सैलाब की एक प्रखर लहर बन सके और असंख्य ऊर्जस्वित लहरों का यह सैलाब उमड़ कर आज की अनाचारी  व्यवस्था को धराशायी कर दे, और फिर उस सपाट हो गए धरातल पर एक नयी व्यवस्था का निर्माण  कर सके सुराज ला सके.

३. १९४७ में भारत में स्वराज तो आ गया मगर सुराज अभी भी बहुत दूर है. भारतीय सुराज मंच भारत में सुराज या गुड गवर्नेंस लाने का प्रयास करने वाला संगठन है. सुराज लाने के लिए कुछ मूलभूत बातें आवश्यक हैं, जो निम्नलिखित हैं -  

क) व्यवस्था परिवर्तन का स्पष्ट ब्लूप्रिंट - सबसे पहले तो यह निर्णय करना पड़ेगा की राष्ट्रीय जीवन के प्रधान क्षेत्रों - जैसे शिक्षा, कृषि, उद्योग, राजनीतिक व्यवस्था, चुनावी व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था आदि - में क्या सुधार किये जाएँ. अर्थात, व्यवस्था-परिवर्तन की एक स्पष्ट रूपरेखा या ब्लूप्रिंट देश के सामने रखना आवश्यक होगा जिसपर व्यापक जनतांत्रिक बहस हो सके और उन विचारों को स्वीकार या अस्वीकार किया जा सके. अनेक मुख्य क्षेत्रों में सुधार के ब्लूप्रिंट तैयार करने का काम एक अच्छे स्तर तक पूरा कर लिया गया है, जिसके एक अंश को लगभग छह सौ पन्नों की एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित भी किया जाना  है. यह ब्लू-प्रिंट आपके सामने भी रखा जाएगा और यदि आपके साथ सहभागिता बनी तो आपसे इस पर विस्तृत चर्चा होगी, और आपके सुझावों से इसे और भी परिवर्धित-संवर्धित किया जायेगा. समग्र क्रान्ति और सम्पूर्ण निर्माण के लिए ये ब्लू-प्रिंट प्रस्थान  बिंदु का काम कर सकते हैं. ये अनंतिम हैं, और इन्हें आगे और विकसित किया जा सकता है.

ख) व्यवस्था-परिवर्तन लाने के लिए व्यक्ति और नेतृत्व तैयार करना - परिवर्तन की कोई भी रूप-रेखा या ब्लूप्रिंट, चाहे वह कितनी भी सुविचारित व सशक्त क्यों न हो, बेकार है, अगर सत्ता में आने पर उस ब्लूप्रिंट को लागू करने वाले लोग कर्तव्यनिष्ठ,  दक्ष और ईमानदार न हों, या सत्ता में न रहने पर जो व्यवस्था-परिवर्तन की रूपरेखा को लागू कराने के लिए ईमानदार संघर्ष न कर सकें और सत्ताधारियों को अपेक्षित परिवर्तन लाने के लिए मजबूर न कर सकें.  इसलिए ऐसे युवाओं और अन्य लोगों की शिनाख्त करना और उन्हें तैयार करना जरूरी होगा जो दोनों ही स्थितियों में कुशल नेतृत्व प्रदान कर सकें. राज्य या देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निर्धारित रचनात्मक और संघर्षात्मक कार्यक्रम लागू करने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तैयार करने होंगे जो स्थानीय कुशल नेतृत्वकर्ताओं  के द्वारा ही तैयार किये जा सकते हैं. इसी विस्तृत नेतृत्व-श्रृंखला को तैयार करने के लिए एक नेतृत्व-विकास कार्यक्रम तैयार किया गया है जो नेतृत्वशक्ति से सहज रूप से सम्पन्न युवाओं की पहचान करेगा और उनमें निहित नेतृत्व के गुणों को  विकसित करने में मदद करेगा.  इस कार्यक्रम के पहले चरण की एक झलकी आपको यू-ट्यूब पर नेतृत्व के मर्म पर एक हिंदी लघु फिल्म से भी मिल सकती है जिससे आपको यह तुरंत अहसास हो कि इस पूरे उद्यम के पीछे एक छोटी-सी मगर ईमानदार तैयारी है. फिल्म देखने के लिए www.suraajdal.org जा कर  ‘महात्मास्मि - द लीडर इन मी’ नामक वीडियो पर क्लिक करें जो मुख पृष्ठ या होम पेज पर दाहिनी और है.

ग) आइडिओलोजी की रूपरेखा  - संगठन और जमात में फर्क होता है. जमात ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकते और जल्द ही टूट कर बिखर जाते हैं. इंडिया अगेंस्ट करप्शन एक जमात था. इसी लिए यह जल्दी ही टूट कर बिखर गया. 'आप' भी एक जमात है. एक संगठन के रूप में व्यक्तियों को जोड़ने के लिए सबसे पहले संगठन के आधारभूत सिद्धांतों या आइडिओलोजी का कथन जरूरी होता है जिसके चारों ओर व्यक्ति इकठ्ठे हो सकें. सुराज मंच ने दो-ढाई पन्नों में अपनी आइडिओलोजी का एक  प्रारूप हिंदी और अंगरेजी दोनों भाषाओँ में  सामने रखा है जो दल की वेबसाईट पर पाया जा सकता है ताकि आप मन बना सकें की क्या आप इससे सहमत हैं. अगर ये सिद्धांत आपके ही विचारों और भावनाओं को प्रतिबिंबित करते हैं  तो आप इन सिद्धांतों पर आधारित एक संगठन के अंग बनने में ख़ुशी महसूस करेंगे. अगर आप इस आइडिओलोजी से पूर्णतः सहमत नहीं तो भी अगर हम वैचारिक रूप से एक  दूसरे के करीब पड़ते हैं तो हम एक दूसरे के कार्यों में सहयोग कर सकते हैं. इसलिए कृपया इस ढाई पृष्ठों की आइडिओलोजी का एक बार गंभीरता से अवलोकन कर  लें, ऐसा आपसे आग्रह है.  

४. उपर्युक्त अजेंडे को अंजाम देने के लिए एकजुट होने के लिए सुराज दल से संपर्क करेंगे तो ख़ुशी होगी.

५. इसमें संदेह नहीं की हम साथ मिल कर देश का परिदृश्य बदल सकते हैं. हमसे आप हमारे फोन नंबरों के अतिरिक्त हमारे ई-मेल पर भी संपर्क कर सकते हैं (suraajdal@gmail.com). यह और भी बेहतर होगा  चूँकि लिखित रूप से हमारे पास विचार करने की सामग्री आ जाएगी, और एक रेकॉर्ड बन जाएगा. ई-मेल न हो तो लिखित रूप से भी पत्राचार हो सकता है.  मगर इसका अर्थ यह नहीं कि हम तत्काल फोन पर बातें नहीं कर सकते या एस.एम.एस. नहीं कर सकते.

पी के सिद्धार्थ 
pradeep.k.siddharth@gmail.com
8252667070 / 9910774066




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