Wednesday, 22 April 2015

राम राज्य का विचार " भाग ७

दंड जतिंह कर भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज |
जीतहु मनहि सुनिअ अस रामचंद्र के राज ||

साधारण अर्थ : श्री रामचन्द्र जी के राज्य में दंड केवल सन्यासियों  के हाथ में है और भेद नाचने वालों के नृत्य समाज में है और ‘जीतो’ शब्द केवल मन के जितने के लिए ही सुनाई पड़ता है.


विशेष टिपण्णी : आर्थात राजनीति में शत्रुओं को जीतने तथा चोर डाकुओं आदि को दमन करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद ये चार उपाय किये जाते हैं. राम राज्य में कोई शत्रु है ही नहीं, इसलिए ‘जीतो’ शब्द केवल मन के जीतने के लिए कहा जाता है. कोई अपराध करता ही नहीं, इसलिए दंड किसी को नहीं होता; ‘दंड’ शब्द केवल संन्यासियों के हाथ में रहने वाले दंड के लिए ही रह गया है तथा सभी अनुकूल होने के कारण भेद नीति की आवश्यकता ही नहीं रह गयी; ‘भेद’ शब्द केवल सुर-ताल के भेद के लिए ही काम में आता है. अर्थात ‘स्टेट विल विदर अवे’ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है जिसे सामाजिक-राजनीतिक विकास का अंतिम चरण माना जाता है.  

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