एक राजनीतिक संगटन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण चीज़ है एक
क्रान्तिकारी कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार करना – ‘प्रोग्राम ऑफ़ एक्शन’ तैयार
करना. इसके दो भाग होते हैं –
·
पहला, ऐसा कार्यक्रम जिसे सत्ता में
पहुँचने पर लागू किया जा सके - ऐसा न हो कि सत्ता में जनता ने भेज दिया और पता ही
नहीं कि पहले से भिन्न करना क्या है; ऐसा कार्य क्रम जिसको लागू करने के लिए,
सत्ता में नहीं पहुँचने पर, सत्ता के बाहर रह कर संघर्ष किया जा सके, क्यों कि इन
कार्यक्रमों को विधायिका और कार्यपालिका
के द्वारा ही अंजाम दिया जा सकता है (आवश्यक क़ानून बना कर, नियम बना कर, आदेश
निकाल कर). भारतीय सुराज दल के लिए ऐसे कार्यक्रम का एक बड़ा अंश विकसित कर लगभग ५०० पन्नों की एक पुस्तक ‘सम्पूर्ण क्रान्ति की भूमिका’ में सामने रखे गए हैं.
· दूसरा, ऐसा रचनात्मक कार्यक्रम जिसे लागू
करने के लिए विधायिका या कार्यपालिका की कोई जरूरत नहीं हो और जो जनता और संगठन के
अपने बूते पर चलाया जा सके. संगठन के लिए विकसित किये गए एक रचनात्मक कार्यक्रम की
एक संक्षिप्त रूप-रेखा इसी पुस्तिका के अंत में पाई जा सकती है. सदस्य उन्हें अपने
अपने क्षेत्रों में लागू करें. संगठन के ऐसे सदस्य जो संघर्ष के कार्यक्रमों में
भाग लेने में समर्थ नहीं हों, वे सिर्फ रचनात्मक कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं. बाकी
सदस्य संघर्ष और रचना दोनों के कार्यक्रम लागू करेने में योगदान करेंगे.
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