Friday, 17 April 2015

राम राज्य का विचार : भाग ५

सब निर्दंभ धर्मरत पुनी | नर अरु नारि चतुर सब गुनी ||
सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी | सब कृतज्ञ नहिं कपट सयानी ||

साधारण अर्थ : सभी दंभ रहित हैं, धर्म परायण हैं और पुण्यात्मा हैं. पुरुष और स्त्री सभी चतुर और गुणवान हैं. सभी गुणों का आदर करने वाले और पंडित हैं तथा सभी ग्यानी हैं. सभी कृतज्ञ हैं; कपट चतुराई (धूर्तता) किसी में नहीं है.


विशेष टिपण्णी : सभी निर्दंभ यानी घमंड-रहित थे यह इस बात का संकेत करता है कि शिक्षा- व्यवस्था में ‘भावनात्मक साक्षरता’ (इमोशनल लिट्रेसी) और  ‘भावना परिष्करण’ (इमोशन कल्चरिंग) एवं  ‘भावना प्रबंधन’ (इमोशन मैनेजमेंट) की विशेष व्यवस्था थी. अन्य उद्दृत दोहों- चौपाईयों में वर्णित जन व्यापी  स्तर पर अच्छी भावनाओं को देख कर भी यही अनुमान लगाया जा सकता है, और यह तथ्य आने वाले समय में शिक्षाज-व्यवस्था में भावना-प्रबंधन को हमारी शिक्षा व्यवस्था का अंग बनाने की जरूरत को रेखांकित करता है.  

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